चर्चा में क्यों?
- हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में जानकारी दी कि 2022 में भारत में छात्र आत्महत्याएं कुल आत्महत्याओं का 6 प्रतिशत थीं। यह आंकड़ा 2021 के 8.0 प्रतिशत और 2020 के 8.2 प्रतिशत से थोड़ी गिरावट दर्शाता है।
मुख्य आंकड़े और रुझान:
- संख्या: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल आत्महत्याओं का 6% छात्रों द्वारा किया गया था। यह 2021 में 8.0% और 2020 में 8.2% से मामूली गिरावट है, लेकिन फिर भी यह एक गहरी मानसिक स्वास्थ्य संकट को दर्शाता है। अनुमान है कि हर साल लगभग 13,000 छात्र आत्महत्या करते हैं।
- सर्वाधिक प्रभावित राज्य: महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश अकेले इन दुखद घटनाओं में लगभग एक तिहाई का योगदान करते हैं।
- लिंग-वार: पुरुष छात्रों की आत्महत्याएं महिला छात्रों की तुलना में अधिक हैं।
आत्महत्या के प्रमुख कारण:
1. शैक्षणिक दबाव:
- अत्यधिक प्रतिस्पर्धा: प्रवेश परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षाओं और उच्च कट-ऑफ प्रतिशत के कारण शिक्षा एक "चूहे की दौड़" बन गई है।
- असफलता का डर: छात्रों को बताया जाता है कि उनका भविष्य पूरी तरह से ग्रेड पर निर्भर करता है, जिससे माता-पिता को निराश करने का डर, अवसाद और आत्महत्या के विचार उत्पन्न होते हैं।
- कोचिंग संस्थानों का प्रभाव: कोचिंग संस्थान इस दबाव को और बढ़ाते हैं, जिससे छात्रों को स्कूल और कोचिंग के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता है।
- अंकों पर अत्यधिक ध्यान: माता-पिता बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं और केवल ग्रेड पर ध्यान देते हैं।
2. संस्थागत कारण:
- बदमाशी (Bullying), जातिगत भेदभाव, रैगिंग और विषाक्त संस्थागत संस्कृति
- सहकर्मी दबाव
- पर्याप्त समर्थन प्रणाली की कमी और अलगाव में अध्ययन करना
3. पारिवारिक मुद्दे:
- पारिवारिक संघर्ष और अस्थिरता (तलाक, अलगाव, वित्तीय कठिनाइयाँ)
- माता-पिता की उपेक्षा
- प्रियजनों का खोना
- अवसाद या अन्य मानसिक बीमारियों का इतिहास
- प्रतिकूल बचपन के अनुभव
- सामाजिक मीडिया की लत
- माता-पिता के साथ संचार अंतराल
4. सामाजिक कारण:
- मदद मांगने और मानसिक बीमारी से जुड़ा कलंक
- सफलता की संकीर्ण परिभाषा: "आप या तो असफल होते हैं या आप एक प्रतिभाशाली होते हैं।"
- लैंगिक असमानता, हिंसा, और रोजगार के अवसरों की कमी
- डिजिटल लत, गलत सूचना, और मीडिया में आत्महत्या का हानिकारक चित्रण
भारत में मानसिक स्वास्थ्य पहल और हस्तक्षेप :
भारत ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए कई नीतिगत पहलें और मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप लागू किए हैं:
- टेली-मानस कार्यक्रम: यह राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (डायल 14416) मानसिक स्वास्थ्य सहायता को सुलभ बनाती है। अब तक 36 मिलियन से अधिक कॉल संभाली जा चुकी हैं।
- जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP): स्कूलों में आत्महत्या-विरोधी सेवाएँ और जीवन कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय आत्महत्या निवारण रणनीति (NSPS): 2030 तक आत्महत्या दरों में 10% की कमी का लक्ष्य। इसमें मीडिया संवेदीकरण, स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत करना, और घातक साधनों तक पहुँच को सीमित करना शामिल है।
- मनोदर्पण कार्यक्रम: शिक्षा मंत्रालय की पहल, जो हेल्पलाइन और लाइव सत्रों के माध्यम से छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करता है।
- नशा-विरोधी अभियान: मादक द्रव्यों के सेवन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं दोनों से निपटने हेतु जागरूकता प्रयास।
- यूजीसी एडवाइजरी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों को शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, और छात्र कल्याण को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
- तनाव प्रबंधन कार्यशालाएँ: IIT-मद्रास, IIT-दिल्ली, और IIT-गुवाहाटी ने मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत लचीलापन-निर्माण सत्र शुरू किए।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप (2025): सुप्रीम कोर्ट ने "आत्महत्या महामारी" घोषित की और लचीला पाठ्यक्रम, निरंतर मूल्यांकन, और कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य सहायता बढ़ाने की सिफारिश की।
निष्कर्ष:
- यह एक ऐसी चुनौती है जिसके लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, माता-पिता और समाज सभी के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। हमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी और उन्हें एक ऐसा वातावरण प्रदान करना होगा जहां वे बिना किसी डर के अपनी समस्याओं का सामना कर सकें और मदद मांग सकें।
UPSC PT परीक्षा प्रश्न:
प्रश्न: हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में छात्र आत्महत्याओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 2022 में छात्र आत्महत्याओं का प्रतिशत 2021 और 2020 की तुलना में थोड़ा कम हुआ है।
- महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक छात्र आत्महत्याएं दर्ज की गईं।
- पुरुष छात्रों की तुलना में महिला छात्रों में आत्महत्या दर अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
UPSC MAINS परीक्षा प्रश्न:
1. भारत में छात्र आत्महत्याओं के बढ़ते मामले एक गंभीर सामाजिक-मनोवैज्ञानिक समस्या हैं। इसके कारणों का विश्लेषण करते हुए, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा कीजिए। (250 शब्द)
2. "शैक्षणिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ भारतीय युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट का प्रमुख कारण हैं।" इस कथन के आलोक में, छात्र आत्महत्याओं की रोकथाम के लिए एक समग्र रणनीति सुझाइए। (250 शब्द)
3. राष्ट्रीय आत्महत्या निवारण रणनीति (NSPS) और टेली-मानस जैसी पहलों के बावजूद, भारत में छात्र आत्महत्याओं में स्थायी कमी नहीं आई है। इसके पीछे के संरचनात्मक कारकों की चर्चा करें। (150 शब्द)
4. महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में छात्र आत्महत्याओं की उच्च दर के क्या कारण हैं? राज्य-विशिष्ट हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए। (200 शब्द)
5. "आत्महत्या महामारी" से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। क्या शैक्षणिक प्रणाली में बड़े सुधारों की आवश्यकता है? (200 शब्द)
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