भारत में परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश: एक नई नीति दिशा

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  • भारत सरकार ने हाल ही में नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधारों की घोषणा की है। यह कदम देश की बढ़ती ऊर्जा मांग, जलवायु लक्ष्यों और परमाणु क्षमता विस्तार की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उठाया गया है।

पृष्ठभूमि और लक्ष्य

  • भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करना है, जो वर्तमान में उत्पादित 8780 मेगावाट (MW) से काफी अधिक है। 2031-32 तक इस क्षमता को 22,480 MW तक बढ़ाने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक हो गई है क्योंकि वर्तमान में, परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत केवल सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाएं, जैसे कि न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), परमाणु ऊर्जा का उत्पादन और आपूर्ति कर सकती हैं।

निजी क्षेत्र की भागीदारी की आवश्यकता

  • बढ़ती ऊर्जा मांग: अनुमान है कि 2047 तक भारत की बिजली की मांग 4-5 गुना बढ़ जाएगी। परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ, इस "बेस-लोड" मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
  • पर्यावरण लक्ष्य:
    • 2030 तक 2005 के स्तर से अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 44% की कमी लाना।
    • 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 50% संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता प्राप्त करना।
  • क्षमता वृद्धि: 100 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश और उन्नत प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है, जिसमें निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निजी क्षेत्र की चिंताएं और प्रस्तावित सुधार

  • निजी क्षेत्र, विशेषकर विदेशी आपूर्तिकर्ता, भारत के परमाणु क्षेत्र में निवेश करने में कुछ प्रमुख चिंताओं का सामना कर रहे हैं। ये चिंताएं मुख्य रूप से परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLNDA), 2010 से संबंधित हैं।

परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLNDA) 2010

CLNDA 2010 ऑपरेटर पर सख्त और दोष-मुक्त दायित्व लगाता है, लेकिन इसकी धारा 17 (आपूर्तिकर्ता दायित्व) और धारा 46 (कानूनी अस्पष्टता) निजी आपूर्तिकर्ताओं के लिए विशेष चिंता का विषय रही है:

  • आपूर्तिकर्ता दायित्व (धारा 17):
    • 17(a): यदि अनुबंध में सहमति हो।
    • 17(b): यदि घटना दोषपूर्ण उपकरण या सेवाओं के कारण होती है (भले ही जानबूझकर न हो)।
    • 17(c): यदि आपूर्तिकर्ता द्वारा जानबूझकर कारण बनाया गया हो। यह प्रावधान परमाणु क्षति के लिए पूरक क्षतिपूर्ति पर कन्वेंशन (CSC) से आगे जाता है, जो केवल संविदात्मक सहमति या जानबूझकर गलत कार्य सिद्ध होने पर ही कार्रवाई की अनुमति देता है। आपूर्तिकर्ता CLNDA के तहत असीमित दायित्व के डर के कारण संकोच करते हैं।
  • कानूनी अस्पष्टता (धारा 46): यह धारा बताती है कि अधिनियम अन्य कानूनी कार्यवाही (नागरिक/आपराधिक) पर रोक नहीं लगाता है, जिससे CLNDA के बाहर नागरिक मुकदमों का द्वार खुल जाता है। इससे आपूर्तिकर्ताओं में टॉर्ट कानून (अपकृत्य विधि) के तहत मुकदमा चलाए जाने का डर पैदा होता है, जिससे असीमित दायित्व की आशंका बढ़ जाती है, भले ही ऑपरेटर के लिए दायित्व सीमित हो (जो ₹1,500 करोड़ है)।

प्रस्तावित कानूनी सुधार

बजट 2025 में, वित्त मंत्री ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में संशोधन का इरादा जताया।

  • CLNDA 2010 में संशोधन:
    • उद्देश्य: परमाणु दुर्घटना की स्थिति में उपकरण आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व को सीमित करना।
    • प्रस्तावित परिवर्तन: दायित्व को मूल अनुबंध मूल्य तक सीमित किया जा सकता है, और दायित्व की अवधि के लिए एक समय-सीमा लागू की जा सकती है।
  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 में संशोधन:
    • उद्देश्य: निजी और विदेशी खिलाड़ियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्रवेश की अनुमति देना।
    • वर्तमान प्रतिबंध: केवल सरकारी संस्थाएं परमाणु संयंत्रों का संचालन कर सकती हैं।
    • प्रस्तावित परिवर्तन: आगामी परियोजनाओं में विदेशी/निजी संस्थाओं की अल्पसंख्यक इक्विटी भागीदारी की अनुमति देना।

निष्कर्ष

  • भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाया गया यह कदम एक बड़ा नीति परिवर्तन है। इससे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और वैश्विक निवेश आकर्षण में संतुलन बना सकेगा।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

  1. भारत सरकार द्वारा हाल ही में घोषित नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
    a) केवल कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को प्रतिस्थापित करना
    b) 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना
    c) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को पूरी तरह प्रतिबंधित करना
    d) केवल सरकारी कंपनियों को लाभ पहुंचाना

    उत्तर: (b) 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना

  1. परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLNDA), 2010 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा प्रावधान निजी आपूर्तिकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है?
    a) धारा 17 – आपूर्तिकर्ता दायित्व
    b) धारा 46 – कानूनी अस्पष्टता
    c) (a) और (b) दोनों
    d) इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: (c) (a) और (b) दोनों

  1. भारत का वर्तमान परमाणु ऊर्जा उत्पादन कितना है?
    a) 8780 MW
    b) 22,480 MW
    c) 50 GW
    d) 100 GW

    उत्तर: (a) 8780 MW

  1. भारत का लक्ष्य 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से कितनी संचयी विद्युत शक्ति स्थापित करना है?
    a) 30%
    b) 40%
    c) 50%
    d) 60%

    उत्तर: (c) 50%

UPSC मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए विश्लेषणात्मक प्रश्न:

  1. भारत सरकार द्वारा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित नीतिगत सुधारों की आवश्यकता और संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
    (250 शब्द, 15 अंक)
  2. परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (CLNDA), 2010 में संशोधन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। ये संशोधन भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश को कैसे प्रभावित करेंगे?
    (200 शब्द, 10 अंक)
  3. भारत के 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में निजी क्षेत्र की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, इससे जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।
    (150 शब्द, 10 अंक)

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