उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: संवैधानिक दृष्टिकोण और चयन प्रक्रिया

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  • भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अप्रत्याशित रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। उनका यह इस्तीफा उनके पांच साल के कार्यकाल के दो साल शेष रहते हुए आया है, जो अगस्त 2022 में शुरू हुआ था।
  • उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। 
  • जब तक कोई नया उपराष्ट्रपति नहीं चुना जाता, राज्यसभा के उपसभापति राज्यसभा की कार्यवाही की जिम्मेदारी संभालेंगे।

भारत का उपराष्ट्रपति: एक अवलोकन

  • भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है । अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
  • भारत के उपराष्ट्रपति का पद भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पद संवैधानिक रूप से राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है और साथ ही, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या पद में रिक्ति की स्थिति में उनके कर्तव्यों का निर्वहन भी करता है। 

उपराष्ट्रपति: राज्यसभा के पदेन सभापति

  • भारत का उपराष्ट्रपति स्वाभाविक रूप से राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। इसका अर्थ है कि जो भी व्यक्ति उपराष्ट्रपति का पद धारण करेगा, वह स्वतः ही राज्यसभा का सभापति भी होगा और उसे किसी अन्य लाभ के पद पर रहने की अनुमति नहीं है।
  • अपवाद - यदि उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा है या राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है, तो उस अवधि के दौरान वह राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में, उसे राज्यसभा के सभापति के वेतन या भत्ते का भी हक नहीं होगा, जो कि अनुच्छेद 97 में उल्लिखित है।

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 67 उपराष्ट्रपति के पद की अवधि (कार्यकाल) का वर्णन करता है। 

  • कार्यकाल की अवधि: उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तिथि से पाँच वर्षों के लिए कार्यरत रहते हैं।
  • पद पर बने रहना: पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी, उपराष्ट्रपति तब तक अपने पद पर बने रहते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण नहीं कर लेता। यह सुनिश्चित करता है कि उपराष्ट्रपति का पद कभी खाली न रहे।

उपराष्ट्रपति को पद से हटाना

भारत के उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67(b) में उल्लिखित है। यह प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • राज्यसभा की भूमिका: उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू किया जा सकता है।
  • प्रभावी बहुमत: राज्यसभा को यह प्रस्ताव "सभी तत्कालीन सदस्यों के प्रभावी बहुमत" से पारित करना होगा। प्रभावी बहुमत का अर्थ है सदन की कुल सदस्यता में से रिक्तियों को घटाने के बाद जो संख्या बचती है, उसके आधे से अधिक सदस्यों का बहुमत।
  • लोकसभा की सहमति: राज्यसभा द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद, उस पर लोकसभा की "सहमति" आवश्यक है। लोकसभा को इसे साधारण बहुमत से स्वीकार करना होता है।
  • पूर्व सूचना: इस तरह का कोई भी प्रस्ताव लाने से पहले उपराष्ट्रपति को कम से कम 14 दिन का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
  • राज्यसभा में चर्चा: 14 दिन की नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद, राज्यसभा अनुच्छेद 67(b) में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रस्ताव पर चर्चा करती है।

राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना: 

  • यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, या हटाए जाने के कारण रिक्त हो जाता है, या यदि राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी, या किसी अन्य कारण से अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होते हैं, तो उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं या उनके कार्यों का निर्वहन करते हैं. इस दौरान, उन्हें राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ, उन्मुक्तियाँ, वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं ।

भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं कार्य

भारत के उपराष्ट्रपति का प्राथमिक कार्य राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करना है। इस भूमिका में उनकी शक्तियाँ और कार्य इस प्रकार हैं:

  • सदन की कार्यवाही का संचालन: यदि राज्यसभा में कोरम (गणपूर्ति) पूरा नहीं होता है, तो सभापति सदन की कार्यवाही को स्थगित कर सकते हैं या बैठक को निलंबित कर सकते हैं।
  • दल-बदल पर निर्णय: संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, सभापति को किसी राज्यसभा सदस्य की दल-बदल के आधार पर अयोग्यता पर निर्णय लेने का अधिकार है।
  • विशेषाधिकार हनन के मामलों में भूमिका: सदन में विशेषाधिकार हनन का कोई भी प्रश्न उठाने के लिए सभापति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • संसदीय समितियों का मार्गदर्शन: संसदीय समितियाँ, चाहे वे सभापति द्वारा गठित की गई हों या सदन द्वारा, सभापति के मार्गदर्शन में कार्य करती हैं।
  • समितियों में नियुक्तियाँ और अध्यक्षता: सभापति विभिन्न स्थायी समितियों और विभागीय संसदीय समितियों के सदस्यों की नियुक्ति करते हैं। वे स्वयं कार्य मंत्रणा समिति, नियम समिति, और सामान्य प्रयोजन समिति की अध्यक्षता भी करते हैं।
  • नियमों और संविधान की व्याख्या: सभापति संविधान और सदन से संबंधित नियमों की व्याख्या करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। सभापति द्वारा की गई किसी भी व्याख्या पर कोई विवाद नहीं कर सकता है। उनकी व्याख्या अंतिम मानी जाती है।

ये शक्तियाँ और कार्य सुनिश्चित करते हैं कि उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति के रूप में, सदन के सुचारू संचालन, नियमों के अनुपालन और सदस्यों के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निर्वाचन और योग्यताएँ

  • उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है ।
  • नोट - मूल संविधान में, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक द्वारा होता था। यह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली थी। जिसे 11वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 के द्वारा समाप्त कर दिया।

उपराष्ट्रपति पद योग्यताएँ : 

  • भारत का नागरिक हो.
  • 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो.
  • राज्य सभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो.
  • किसी भी लाभ के पद पर न हो.

पद से हटाना

  • उपराष्ट्रपति को राज्य सभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित करके हटाया जा सकता है, जिसे उस समय सभा के प्रभावी बहुमत (तत्कालीन सदस्यों का बहुमत) द्वारा पारित किया जाना चाहिए और लोक सभा द्वारा साधारण बहुमत से स्वीकृत किया जाना चाहिए. ऐसा प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिनों की पूर्व सूचना देना अनिवार्य है.
  • महत्वपूर्ण तथ्य: उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए "प्रभावी बहुमत" (तत्कालीन सदस्य संख्या - रिक्तियाँ) की आवश्यकता होती है, न कि "निरपेक्ष बहुमत" (सदन की कुल सदस्य संख्या का आधा).

उपराष्ट्रपति वेतन और भत्ते

  • भारत के उपराष्ट्रपति का वेतन और भत्ते "संसद अधिकारी के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1953" (Salary and Allowances of Officers of Parliament Act, 1953) के तहत निर्धारित होते हैं। 
  • वेतन:  2018 में हुए संशोधन के बाद, उपराष्ट्रपति को प्रति माह ₹4,00,000 (चार लाख रुपये) का वेतन मिलता है। इससे पहले यह ₹1,25,000 प्रति माह था।

संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 63-73)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 से 73 उपराष्ट्रपति के पद, निर्वाचन, शक्तियों और हटाने की प्रक्रिया से संबंधित हैं:

  • अनुच्छेद 63: भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा.
  • अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा.
  • अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद में रिक्ति या अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति की भूमिका.
  • अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन और योग्यताएँ.
  • अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया.
  • अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव.
  • अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान.
  • अनुच्छेद 70: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन.
  • अनुच्छेद 71: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित मामले.
  • अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (यद्यपि यह राष्ट्रपति से संबंधित है, यह अनुच्छेद संविधान के इसी खंड में शामिल है).
  • अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार.

भारत औरअमेरिका के उपराष्ट्रपति में अंतर

विषय

भारत के उपराष्ट्रपति

अमेरिका के उपराष्ट्रपति

कार्यकाल

5 वर्ष, पुनः निर्वाचन संभव

4 वर्ष, पुनः निर्वाचन संभव

विधायी भूमिका

राज्यसभा के पदेन सभापति

सीनेट के अध्यक्ष (टाई होने पर निर्णायक मत देते हैं)

कार्यपालिका में भूमिका

राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति

राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर पूर्ण राष्ट्रपति बनते हैं

प्रमुख जिम्मेदारी

विधायी कार्यवाही का संचालन

राष्ट्रपति का उत्तराधिकारी, कार्यपालिका में अधिक सक्रिय भूमिका

चुनाव प्रक्रिया

निर्वाचक मंडल द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव

आम चुनाव के साथ राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के साथ निर्वाचित

भारत के उपराष्ट्रपति

क्रम

नाम

काल

1

डॉ एस राधाकृष्णन

1952 – 1957, 1957 – 1962

2

डॉ जाकिर हुसैन

1962  –  1967

3

वराहगिरी वेंकट गिरि

1967  –  1969

4

गोपाल स्वरूप पाठक

1969  –  1974

5

बासप्पा दानप्पा जट्टी

1974  –  1979

6

मुहम्मद हिदायत उल्लाह

1979  –  1984

7

रामास्वामी वेंकटरमन

1984  –  1987

8

शंकर दयाल शर्मा

1987  –  1992

9

कोचेरील रमन नारायणन

1992  –  1997

10

कृष्ण कांत

1997  –  2002

11

भैरों सिंह शेखावत

2002  –  2007

12

मोहम्मद हामिद अंसारी

2007  —2017

13

मुप्पावरापु वेंकैया नायडू

2017- 2022

14

जगदीप धनखड़

2022 – 21 जुलाई 2025

  UPSC और SPSC के लिए संभावित MCQ Questions 

1. भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन किसके द्वारा किया जाता है ?
(a) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
(b) राज्यसभा और लोकसभा के सभी सदस्य
(c) राज्य विधानसभाओं के सदस्य
(d) राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत

उत्तर: (a) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य

2. उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए कौन-सा प्रावधान लागू होता है?

(a) राज्यसभा द्वारा प्रभावी बहुमत से प्रस्ताव पारित करना और लोकसभा द्वारा सहमति

(b) राष्ट्रपति द्वारा हटाने का आदेश
(c) संसद के दोनों सदनों में 2/3 बहुमत से महाभियोग
(d) उच्चतम न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित करना

उत्तर: (a) राज्यसभा द्वारा प्रभावी बहुमत से प्रस्ताव पारित करना और लोकसभा द्वारा सहमति

3. उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
(a) 30 वर्ष
(b) 35 वर्ष
(c) 40 वर्ष
(d) 25 वर्ष

उत्तर: (b) 35 वर्ष

4. यदि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तो उसे क्या वेतन मिलता है?
(a) उपराष्ट्रपति का वेतन
(b) राष्ट्रपति का वेतन
(c) दोनों पदों का वेतन
(d) कोई वेतन नहीं

उत्तर: (b) राष्ट्रपति का वेतन

5. उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि कितनी होती है?
(a) 4 वर्ष
(b) 5 वर्ष
(c) 6 वर्ष
(d) राष्ट्रपति के कार्यकाल के साथ समाप्त होता है

उत्तर: (b) 5 वर्ष

6. उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव कहाँ पेश किया जा सकता है?
(a) केवल लोकसभा में
(b) केवल राज्यसभा में
(c) संसद के किसी भी सदन में
(d) राष्ट्रपति द्वारा सीधे हटाया जा सकता है

उत्तर: (b) केवल राज्यसभा में

7. उपराष्ट्रपति का पद किस अनुच्छेद में वर्णित है?
(a) अनुच्छेद 52
(b) अनुच्छेद 63
(c) अनुच्छेद 74
(d) अनुच्छेद 80

उत्तर: (b) अनुच्छेद 63

8. यदि उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है, तो नया उपराष्ट्रपति कितने समय के भीतर चुना जाना चाहिए?
(a) 3 महीने
(b) 6 महीने
(c) 1 वर्ष
(d) संविधान में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है

उत्तर: (b) 6 महीने

UPSC और SPSC के लिए संभावित Mains Exam Questions 

  • प्रश्न 1: "भारत के उपराष्ट्रपति की भूमिका और शक्तियों का विश्लेषण कीजिए। क्या उपराष्ट्रपति का पद केवल एक औपचारिक पद है, या इसकी वास्तविक राजनीतिक-संवैधानिक महत्ता है?" (10 अंक, 150 शब्द)
  • प्रश्न 2: "उपराष्ट्रपति के निर्वाचन और पदच्युति की प्रक्रिया की तुलना राष्ट्रपति के साथ कीजिए। क्या ये प्रक्रियाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करती हैं?" (15 अंक, 250 शब्द)
  • प्रश्न 3 (निबंधात्मक): "क्या भारत के उपराष्ट्रपति के पद को और अधिक शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है? इस संदर्भ में अमेरिका के उपराष्ट्रपति की भूमिका से तुलना कीजिए।" (20 अंक, 300 शब्द


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