अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस (international moon day)

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  • 20 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस मनाया गया है। यह दिवस 20 जुलाई, 1969 को हुए अपोलो 11 चंद्र मिशन की वर्षगांठ मनाता है, जब नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने थे। यह मानवता की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं में एक अभूतपूर्व सफलता का प्रतीक है, साथ ही भविष्य के लिए नए सपने जगाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस 2025 की थीम - "एक चंद्रमा, एक दृष्टि, एक भविष्य" (One Moon, One Vision, One Future)
  •  2023 की थीम - "चंद्र अन्वेषण समन्वय और स्थिरता" (" Lunar Exploration Coordination and Sustainability ")
  • 2024 की थीम - 'छाया को रोशन करना'(‘Illuminating the Shadows’)
  • ये थीम चंद्रमा के अज्ञात पहलुओं और ज्ञान और अन्वेषण के लिए हमारी निरंतर खोज पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

पृष्ठभूमि और स्थापना

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 9 दिसंबर 2021 को एक प्रस्ताव (A/RES/76/76) पारित करके 20 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस के रूप में घोषित किया। यह घोषणा बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर समिति (COPUOS) की सिफारिश पर आधारित थी। पहला अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस 20 जुलाई 2022 को मनाया गया था।
  • 20 जुलाई 1969 को मिशनअपोलो 11 के दौरान चंद्रमा पर मानव द्वारा पहली बार की गई लैंडिंग की वर्षगांठ में यह दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य चंद्रमा की खोज की उपलब्धि को याद करना और चंद्र अन्वेषण के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना है ।

अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस का महत्व

  • ऐतिहासिक उपलब्धि का स्मरण: यह दिन अपोलो 11 मिशन की उस असाधारण सफलता को याद करता है जब इंसानों ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था। यह मानव जाति के लिए एक बड़ी छलांग थी।
  • वैज्ञानिक अन्वेषण को प्रोत्साहन: यह दिन चंद्रमा और अंतरिक्ष अनुसंधान के महत्व को रेखांकित करता है। भविष्य के मिशन, जैसे आर्टेमिस कार्यक्रम (NASA द्वारा चंद्रमा पर फिर से मानव भेजने की योजना), को प्रेरित करता है।
  • शिक्षा और जागरूकता: अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विद्या और चंद्रमा की भूमिका के बारे में लोगों, विशेषकर युवाओं, को शिक्षित करने का अवसर प्रदान करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: यह दिन दुनिया भर के देशों को अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग करने और शांतिपूर्ण उद्देश्यों से चंद्रमा का उपयोग करने की याद दिलाता है।

चंद्र अन्वेषण में भारत का योगदान

  • भारत ने चंद्र अन्वेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो लागत प्रभावी और अभिनव अंतरिक्ष मिशनों में अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करता है:
  • चंद्रयान-1 (2009): यह मिशन चंद्रमा पर पानी के अणुओं की खोज में महत्वपूर्ण था।
  • चंद्रयान-3 (2023): भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

चंद्र अन्वेषण में भविष्य की योजनाएं

  • भारत अपने चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसरो 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की योजना बना रहा है, जो चंद्र अन्वेषण में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। ये मिशन न केवल वैज्ञानिक ज्ञान में वृद्धि करते हैं बल्कि भारत की तकनीकी क्षमताओं को भी बढ़ाते हैं और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

अपोलो 11 मिशन 

  • अपोलो 11 चंद्रमा पर मानव द्वारा पहली बार उतरने का एक ऐतिहासिक मिशन था, जो 20 जुलाई 1969 को हुआ था. यह संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संचालित किया गया था और इसे मानव इतिहास और अंतरिक्ष अनुसंधान में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है ।

अपोलो 11 मिशन के मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: अपोलो 11 का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी द्वारा 1961 में निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करना था: चंद्रमा पर चालक दल के साथ उतरना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना। 
  • अंतरिक्ष यात्री: इस मिशन में तीन अंतरिक्ष यात्री शामिल थे:
    • नील आर्मस्ट्रांग (कमांडर और चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति)
    • एडविन "बज़" एल्ड्रिन (चंद्रयान चालक और चंद्रमा पर कदम रखने वाले दूसरे व्यक्ति)
    • माइकल कॉलिन्स (नियंत्रण यान चालक, जो चंद्रमा की कक्षा में रहे)
  • लॉन्च: अपोलो 11 को 16 जुलाई 1969 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था।
  • चंद्रमा पर लैंडिंग:
    • चंद्रयान 'ईगल' 20 जुलाई 1969 को अंतर्राष्ट्रीय समयानुसार 20:17:39 बजे चंद्रमा पर, "सी ऑफ ट्रैंक्विलिटी" (शांत सागर) नामक स्थान पर उतरा।
    • नील आर्मस्ट्रांग ने 20 जुलाई की देर रात को चंद्रमा की सतह पर पहला कदम रखा। उन्होंने प्रसिद्ध वाक्य कहा: "यह इंसान का एक छोटा सा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक बड़ी छलांग है।"
    • उनके कुछ मिनट बाद, बज एल्ड्रिन भी चंद्रमा पर उतरे।
  • गतिविधियां: चंद्रमा पर रहते हुए, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने लगभग ढाई घंटे की 'स्पेस वॉक' की। उन्होंने तस्वीरें लीं, चंद्र मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र किए, और अमेरिकी झंडा फहराया। उन्होंने एक परावर्तक प्रिज्मों की श्रृंखला भी स्थापित की, जिसे मून लेजर रेंजिंग एक्सपेरिमेंट के रूप में जाना जाता है, जो आज भी काम कर रहा है और महत्वपूर्ण जानकारी दे रहा है।
  • 24 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन के तीनों अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, बज़ एल्ड्रिन और माइकल कोलिन्स सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। वे प्रशांत महासागर में उतरे थे ।

महत्व:

  • अपोलो 11 मिशन ने शीत युद्ध के दौरान अंतरिक्ष दौड़ में संयुक्त राज्य अमेरिका को सोवियत संघ पर एक महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि इसने पूरी दुनिया को प्रेरित किया और वैज्ञानिक अन्वेषण की सीमाओं को आगे बढ़ाया। यह मिशन मानव महत्वाकांक्षा और इंजीनियरिंग कौशल का एक प्रतीक बना हुआ है।

UPSC PT परीक्षा प्रश्न

  1. अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस कब मनाया जाता है?

    a) 12 अप्रैल

    b) 20 जुलाई

    c) 4 अक्टूबर

    d) 21 फरवरी

    उत्तर: b) 20 जुलाई

  2. अपोलो 11 मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a) यह मिशन 1961 में लॉन्च किया गया था।

b)नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरने वाले पहले व्यक्ति थे।

c) इस मिशन का उद्देश्य मंगल पर जीवन की खोज करना था।

d) यह सोवियत संघ द्वारा संचालित किया गया था।

उत्तर: b) नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरने वाले पहले व्यक्ति थे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. "चंद्र अन्वेषण में भारत की भूमिका ने वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में नए मानदंड स्थापित किए हैं।" विश्लेषण कीजिए। (150-200 शब्द)

  2. अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस की स्थापना क्यों की गई? यह अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य को कैसे प्रभावित करता है? (250 शब्द)



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