चर्चा में क्यों ?
·
भारतीय रिज़र्व
बैंक
(RBI)
के
वित्तीय
समावेशन
सूचकांक
(FI-Index)
में
वित्त वर्ष
2025
में 4.3%
की बढ़ोतरी
दर्ज
की
गई
है.
यह
मार्च
2024
के
64.2
से
बढ़कर
मार्च
2025
में
67
पर पहुंच
गया, जो
वित्तीय
सेवाओं
की
पहुंच, उपयोग
और
गुणवत्ता
में
लगातार
हो
रही
प्रगति
को
दर्शाता
है
।
वित्तीय समावेशन क्या है ?
·
वित्तीय समावेशन
का
तात्पर्य
कम
आय
वाले
लोगों
और
समाज
के
वंचित
वर्गों
तक
वहनीय
कीमत
पर
विभिन्न
वित्तीय सेवाओं
जैसे
भुगतान, बचत, और
ऋण
की
पहुँच
सुनिश्चित
करना
है।
इसे
'समावेशी
वित्तपोषण' भी
कहा
जाता
है।
मुख्य उद्देश्य:
·
वित्तीय समावेशन
का
प्राथमिक
लक्ष्य
उन
सभी
बाधाओं
को
हटाना
है
जो
लोगों
को
वित्तीय
क्षेत्र
में
सक्रिय
रूप
से
भाग
लेने
से
रोकती
हैं।
इसका
उद्देश्य
बिना
किसी
भेदभाव
के, समाज
के
हर
वर्ग
की
विशिष्ट
वित्तीय
आवश्यकताओं
को
पूरा
करने
के
लिए
वित्तीय
सेवाओं
को
आसानी
से
उपलब्ध
कराना
है।
वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index)
·
वित्तीय समावेशन
सूचकांक
(FI-Index)
भारतीय
रिज़र्व
बैंक
(RBI)
द्वारा
विकसित
एक
महत्वपूर्ण
मापक
है, जो
देश
में
वित्तीय
सेवाओं
की
पहुँच, उपयोग
और गुणवत्ता
को
दर्शाता
है।
यह
सूचकांक
यह
ट्रैक
करता
है
कि
समाज
के
विभिन्न
वर्गों, विशेषकर
कम
आय
वाले
लोगों
और
वंचित
समूहों
को
औपचारिक
वित्तीय
प्रणाली
का
लाभ
कितनी
आसानी
और
प्रभावशीलता
से
मिल
रहा
है
।
·
यह वित्तीय समावेशन के विभिन्न पहलुओं को 0
से 100
के बीच के एक मान में दर्शाता है, जहाँ 0
का अर्थ पूर्ण वित्तीय बहिष्करण (किसी को भी वित्तीय सेवा न मिलना) और 100
का अर्थ पूर्ण वित्तीय समावेशन (सभी को वित्तीय सेवा मिलना) है ।
·
डेटा स्रोत:
यह
बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक
और
पेंशन
क्षेत्रों
से
डेटा
एकत्र
करता
है
।
इस
सूचकांक
में
तीन
मुख्य
पैरामीटर
शामिल
हैं:
·
पहुंच (35% वेटेज): यह बताता है कि वित्तीय सेवाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हैं ।
·
उपयोग (45% वेटेज): यह दर्शाता है कि लोग इन सेवाओं का कितनी बार और प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं ।
·
गुणवत्ता (20% वेटेज): इसमें वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण, और असमानताओं व सेवा कमियों में कमी जैसे पहलू शामिल हैं ।
हाल के आंकड़ों की मुख्य बातें
·
सूचकांक का मान मार्च 2024
में 64.2
से बढ़कर मार्च 2025
में 67
हो गया ।
·
पहुंच, उपयोग और गुणवत्ता - सभी उप-सूचकांकों में वृद्धि देखी गई ।
·
वित्त वर्ष 2025
में यह सुधार मुख्य रूप से उपयोग और गुणवत्ता आयामों में लाभ के कारण हुआ, जो वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के साथ गहरे जुड़ाव और चल रहे वित्तीय साक्षरता प्रयासों के प्रभाव को दर्शाता है ।
महत्व
वित्तीय समावेशन कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- यह उद्यमिता और व्यवसाय वृद्धि को बढ़ावा देता है ।
- यह 17
सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में से सात को प्राप्त करने में मदद करता है ।
- यह आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देता है,
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करता है, और गरीबी उन्मूलन में योगदान देता है ।
- यह जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील लोगों और व्यवसायों के लिए लचीलापन बनाने में मदद करता है ।
FI-Index में वृद्धि भारत की वंचित आबादी तक वित्तीय पहुंच का विस्तार करने और उपलब्ध वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने में बढ़ती सफलता का संकेत देती है. यह प्रगति सरकार के आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास के व्यापक एजेंडे का समर्थन करती है, जिससे भारत की औपचारिक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलती है ।
संबंधित पहलें
भारत सरकार ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं:
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): जनवरी 2025 तक 54.58
करोड़ से अधिक खाते खोले गए, जिनमें जमा राशि ₹2.46 लाख करोड़ तक पहुंच गई ।
- अटल पेंशन योजना (APY): जनवरी 2025
तक 7.33 करोड़ नामांकन,
जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 में 89.95
लाख से अधिक नए नामांकन शामिल हैं ।
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): 22.52 करोड़ व्यक्तियों का नामांकन, 8.8 लाख दावों के लिए ₹17,600 करोड़ वितरित ।
- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): 49.12 करोड़ लोगों को कवर किया गया, दुर्घटना दावों के लिए ₹2,994.75 करोड़ संसाधित ।
- स्टैंड-अप इंडिया योजना:
2.36 लाख उद्यमियों के लिए ₹53,609 करोड़ के ऋण स्वीकृत, जिसमें एससी/एसटी और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया ।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): 51.41 करोड़ ऋणों के लिए ₹32.36 लाख करोड़ स्वीकृत, जिसमें 68% ऋण महिलाओं और 50%
एससी/एसटी/ओबीसी श्रेणियों को लाभान्वित करते हैं ।
वित्तीय समावेशन की चुनौतियां
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में कुछ चुनौतियां भी हैं:
- उच्च और निम्न आय वाले देशों के बीच खाता स्वामित्व में बड़ा अंतर बना हुआ है ।
- विशेष रूप से विकासशील देशों में महिलाओं को वित्तीय सेवाओं तक पहुंच की संभावना कम है ।
- अपर्याप्त डिजिटल बुनियादी ढांचा और कम डिजिटल साक्षरता मोबाइल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में बाधा डालती है ।
- कमजोर उपभोक्ता संरक्षण उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी, दुरुपयोग, और पारदर्शिता की कमी के प्रति असुरक्षित बनाता है ।
आगे की राह
·
भारत सरकार की वित्तीय समावेशन (FI) पहलें आर्थिक और सामाजिक रूप से हाशिए पर मौजूद समुदायों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक समान पहुंच प्रदान करके सशक्त बनाने के लिए आधारशिला का काम करती हैं । डिजिटल वित्तीय सेवाओं के सुरक्षित और निष्पक्ष उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाने की आवश्यकता है ।
प्रारंभिक परीक्षा
के लिए संभावित प्रश्न
:
प्रश्न
1: भारतीय
रिजर्व बैंक
(RBI)
के वित्तीय
समावेशन सूचकांक
(FI-Index)
के संदर्भ
में, निम्नलिखित
कथनों पर
विचार कीजिए:
1) यह
सूचकांक
0
से
100
के
पैमाने
पर
वित्तीय
समावेशन
को
मापता
है, जहाँ
100
पूर्ण
समावेशन
को
दर्शाता
है।
2) इस
सूचकांक
में
पहुँच, उपयोग
और
गुणवत्ता
तीन
प्रमुख
आयाम
हैं।
3) मार्च
2025
में
यह
सूचकांक
67
पर
पहुँच
गया, जो
मार्च
2024
के
60.1
से
अधिक
है।
उपर्युक्त
कथनों में
से कौन-से
सही हैं?
(a) केवल 1 और
2
(b) केवल 2 और
3
(c) केवल 1 और
3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
केवल 1 और
2
प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सी योजना भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने से संबंधित नहीं है?
(a) प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY)
(b) अटल पेंशन योजना (APY)
(c) प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY)
(d) स्टैंड-अप इंडिया योजना
उत्तर: (c) प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY)
प्रश्न 3: FI-Index के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कारक गुणवत्ता आयाम के अंतर्गत आता है?
(a) बैंक शाखाओं की संख्या
(b) डिजिटल भुगतान लेनदेन की मात्रा
(c) वित्तीय साक्षरता दर
(d) ऋण खातों की संख्या
उत्तर: (c) वित्तीय साक्षरता दर
प्रश्न 4: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): वित्तीय समावेशन सूचकांक में वृद्धि भारत में औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुँच बढ़ने का संकेत देती है।
कारण (R): प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) जैसी पहलों ने बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीण और कमजोर वर्गों तक पहुँचाया है।
(a) A और R
दोनों सही हैं, और R,
A की सही व्याख्या है।
(b) A और R
दोनों सही हैं, परंतु R,
A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है, परंतु R
गलत है।
(d) A गलत है, परंतु R
सही है।
उत्तर: (a) A और R
दोनों सही हैं, और R,
A की सही व्याख्या है।
मुख्य परीक्षा
प्रश्न:
प्रश्न: "भारत में वित्तीय समावेशन के महत्व एवं चुनौतियों की विवेचना कीजिए। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index) की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।"
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