- भारतीय शहरों के लिए जलवायु लचीलापन: विश्व बैंक की चेतावनी और समाधान विश्व बैंक और भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट “Towards Resilient and Prosperous Cities in India” के अनुसार, भारत में 2050 तक शहरी जनसंख्या लगभग 951 मिलियन हो जाएगी, जो आर्थिक अवसर तो बढ़ाएगी, लेकिन साथ ही बाढ़, अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण जैसे गंभीर जलवायु जोखिमों की चुनौती भी लाएगी ।
- रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि शहरों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक स्वायत्तता और जलवायु-लचीली योजना की आवश्यकता है।
प्रमुख जलवायु जोखिम और प्रभाव
- बाढ़: अंधाधुंध कंक्रीट निर्माण और जलनिकासी की कमी से शहरी बाढ़ बढ़ रही है। अनुमानतः बाढ़ से 2070 तक वार्षिक हानि 30 अरब डॉलर तक पहुँच सकती है।
- गर्मी: शहरी हीट आइलैंड प्रभाव से रात का तापमान बढ़ता है; इससे 2050 तक सालाना 3 लाख मौतें हो सकती हैं। कूल रूफ्स और शहरी हरियाली से राहत संभव है।
- वायु प्रदूषण: 2023 में विश्व के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में से 42 भारत में थे, जिससे करोड़ों लोग श्वसन रोगों से प्रभावित हैं।
शहरी स्थानीय निकायों की चुनौतियाँ
- वित्तीय संकट: संपत्ति कर GDP का केवल 2%, जबकि OECD देशों में 1.1% है। GST ने राजस्व स्रोत सीमित किए।
- संस्थागत कमजोरी: तकनीकी विशेषज्ञता और डेटा की भारी कमी।
- विकेन्द्रीकरण की बाधाएं: 74वां संविधान संशोधन अधूरा लागू; राज्यों ने ULBs को अपेक्षित अधिकार नहीं दिए।
- खंडित शासन: विभागीय समन्वय की कमी से योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन बाधित।
जलवायु लचीलापन के लिए प्रमुख रणनीतियाँ
- अधिक स्वायत्तता: विकेन्द्रीकरण से शहर संसाधन जुटाने और जवाबदेही में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
- हरित और जल-केंद्रित शहरी नियोजन: पार्क, आर्द्रभूमि, खुले क्षेत्र; AMRUT 2.0 और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कार्य।
- जोखिम मूल्यांकन और पूर्व चेतावनी: हीट एक्शन प्लान (जैसे अहमदाबाद मॉडल), भू-स्थानिक डेटा और मौसम मॉडल का उपयोग।
- ऊर्जा-कुशल भवन: राष्ट्रीय सतत आवास मिशन (NMSH) के तहत टिकाऊ आवास, कम-कार्बन परिवहन को बढ़ावा।
- निजी निवेश और PPP मॉडल: जलवायु-लचीले ढांचे के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक।
निष्कर्ष:
- जलवायु संकट के इस दौर में भारतीय शहरों को केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि स्मार्ट, टिकाऊ और समुत्थानशील विकास की ओर बढ़ना होगा। इसके लिए स्थानीय निकायों को सशक्त, नीतिगत विकेंद्रीकरण, और हरित अवसंरचना में निवेश आवश्यक है।
UPSC PT परीक्षा प्रश्न:
1. विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट 'Towards Resilient and Prosperous Cities in India' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- 2050 तक भारत की शहरी जनसंख्या लगभग 951 मिलियन होने का अनुमान है।
- शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के कारण 2050 तक प्रति वर्ष लगभग 3 लाख मौतों का अनुमान है।
- भारत में संपत्ति कर GDP का 1% है, जो OECD देशों के बराबर है।
सही कथन चुनें:
a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
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