- हालिया अध्ययन के अनुसार, लक्षद्वीप द्वीपसमूह में प्रवाल (कोरल) आवरण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 1998 में जहां प्रवाल आवरण 24% था, वहीं 24 वर्षों में यह घटकर केवल 19.6% रह गया है, अर्थात लगभग 50% की कमी।
कोरल क्या हैं?
- कोरल वास्तव में छोटे अकशेरुकी जीव होते हैं, जो 'स्निडेरिया' (Cnidaria) संघ से संबंधित होते हैं। ये कोरल पॉलिप्स नामक सूक्ष्म, नरम जीवों से बनते हैं, जो अपनी सुरक्षा के लिए कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) से बना एक कठोर बाह्य कंकाल स्रावित करते हैं। समय के साथ, लाखों पॉलिप्स द्वारा निर्मित ये कठोर ढांचे विशाल और जटिल कोरल रीफ (प्रवाल भित्तियाँ) का निर्माण करते हैं, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- कोरल विभिन्न रंगों के हो सकते हैं, जिनमें लाल, बैंगनी, नीला, भूरा और हरा शामिल हैं। इनमें ज़ूक्सांथेली नामक सूक्ष्म शैवाल की उपस्थिति के कारण ये चमकीले और रंगीन दिखाई देते हैं।
कोरल रीफ के प्रकार
- फ्रिंजिंग रीफ: ये तटरेखा के साथ बनते हैं।
- बैरियर रीफ: ये खुले पानी में बनते हैं।
- एटोल: ये गोलाकार रीफ होते हैं जो डूबे हुए ज्वालामुखियों के चारों ओर बनते हैं।
भारत में, कोरल रीफ कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप द्वीप और मालवन में पाए जाते हैं।
कोरल का महत्व :
कोरल समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और तटीय समुदायों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं:
- जैव विविधता का समर्थन: ये समुद्री जीवन के एक चौथाई हिस्से को भोजन, आश्रय, आराम और प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं, जिससे महत्वपूर्ण जैव विविधता की रक्षा के लिए नर्सरी और शरणस्थली के रूप में कार्य करते हैं।
- तटीय समुदायों का समर्थन: ये दुनिया भर में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले 1 अरब से अधिक लोगों को भोजन, आजीविका और मनोरंजन प्रदान करके समर्थन करते हैं।
कोरल ब्लीचिंग के कारण
कोरल ब्लीचिंग तब होती है जब कोरल अपने सहजीवी शैवाल (ज़ूक्सांथेली) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे वे सफेद हो जाते हैं। इसके मुख्य कारण हैं:
- समुद्री हीटवेव और जलवायु परिवर्तन: समुद्री हीटवेव और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे कोरल और शैवाल के बीच का सहजीवी संबंध बाधित होता है। इसका परिणाम बड़े पैमाने पर कोरल ब्लीचिंग और उनकी मृत्यु के रूप में सामने आता है।
- समुद्री अम्लीकरण: समुद्री अम्लीकरण: महासागरों में CO₂ के अधिक मात्रा में घुलने से जल का pH घटता है, जिससे कोरल के लिए कैल्शियम कार्बोनेट का कंकाल बनाना कठिन हो जाता है।
- प्रदूषण: भूमि से बहकर आने वाले उर्वरक, कीटनाशक और सीसा जैसी भारी धातुएं कोरल के स्वास्थ्य और लचीलेपन को नुकसान पहुंचाती हैं।
- भौतिक अशांति: तटीय विकास, अनियंत्रित मछली पकड़ना, तलछट का जमाव और कोरल खनन जैसे मानवीय कार्यों से कोरल रीफ को भौतिक क्षति पहुँचती है या वे तलछट में दब जाते हैं।
- अत्यधिक मछली पकड़ना: मछली आबादी को कम करता है जो रीफ पर शैवाल के विकास को नियंत्रित करती हैं, जिससे कोरल वातावरण और अधिक खराब होता है।
क्या कोरल ब्लीचिंग से उबर सकते हैं?
- कोरल समय के साथ ब्लीचिंग से उबर सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब तापमान कम हो और स्थितियां सामान्य हो जाएं। जब ऐसा होता है, तो शैवाल वापस आ जाते हैं और कोरल धीरे-धीरे अपना स्वास्थ्य वापस पा लेते हैं। हालांकि, गंभीर या लगातार ब्लीचिंग की घटनाएं कोरल की उबरने की क्षमता को गंभीर रूप से बाधित कर सकती हैं ।
UPSC PT परीक्षा प्रश्न:
प्रश्न 1: हाल के अध्ययनों के अनुसार, लक्षद्वीप द्वीपसमूह में कोरल (प्रवाल) आवरण में गिरावट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1998 से 2022 के बीच लक्षद्वीप में कोरल आवरण में लगभग 50% की कमी आई है।
- कोरल ब्लीचिंग का एक प्रमुख कारण समुद्री जल के तापमान में वृद्धि है।
- भारत में कोरल रीफ केवल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न :
प्रश्न1: "लक्षद्वीप में कोरल आवरण में गिरावट एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है।" इस संदर्भ में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए:
- कोरल रीफ्स के पारिस्थितिक महत्व एवं उनके संरक्षण की आवश्यकता।
- कोरल ब्लीचिंग के प्रमुख कारण और इसके दीर्घकालिक प्रभाव।
- भारत सरकार द्वारा कोरल संरक्षण हेतु उठाए गए कदमों की समीक्षा।
(250 शब्द, 15 अंक)
.png)