21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को पुनर्गठित करने वाली नीति की समीक्षा

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  • हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की पाँचवीं वर्षगांठ के अवसर पर 'अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS) 2025' का उद्घाटन किया। यह आयोजन NEP के कार्यान्वयन की अब तक की प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा पर व्यापक मंथन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ है।"
  • NEP 2020 की प्रमुख उपलब्धियाँ                                         

NEP 2020 ने शिक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:

  • "मातृभाषा-आधारित शिक्षा और पाठ्यचर्य सुधार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने 5+3+3+4 की नई शैक्षिक संरचना और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा – स्कूल शिक्षा (NCF-SE) के माध्यम से अनुभवात्मक, समग्र और दक्षता-आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया है। इस नीति के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था में मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा को शिक्षण का प्राथमिक माध्यम बनाकर बच्चों की संज्ञानात्मक वृद्धि और सीखने की क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।"
  • समावेशिता: सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों (SEDG) के 1.15 लाख से अधिक छात्र और 7.58 लाख बालिकाएँ आवासीय विद्यालयों में नामांकित हुई हैं। प्रशस्त ऐप विकलांगता की जाँच में सहायक साबित हुआ है।
  • मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN): निपुण भारत और विद्या प्रवेश के माध्यम से 8.9 लाख विद्यालयों में 4.2 करोड़ से अधिक छात्रों तक पहुँच सुनिश्चित हुई है, जिससे मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता को बढ़ावा मिला है।
  • "शिक्षक प्रशिक्षण: दक्ष, समर्थ और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षकों के विकास की दिशा में, NEP 2020 के तहत निष्ठा पहल के अंतर्गत ‘दीक्षा’ और ‘पीएम ई-विद्या’ जैसे एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यह पहल शिक्षकों की पेशेवर क्षमता निर्माण, नवीन शिक्षण विधाओं के प्रति संवेदनशीलता और तकनीकी साक्षरता को सुदृढ़ करने में सहायक रही है।"
  • "बहु-विषयी और समग्र उच्च शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में बहु-विषयकता, समग्रता और नवाचार को केंद्र में रखती है। इसके अंतर्गत बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालयों (MERUs) की स्थापना को प्रोत्साहित किया गया है, जो विश्व-स्तरीय गुणवत्ता युक्त शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने हेतु लक्षित हैं। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा ने लचीली शिक्षा, क्रेडिट ट्रांसफर और मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट प्रणाली को संभव बनाया है, जिससे छात्र केंद्रित एवं जीवनपर्यंत सीखने को प्रोत्साहन मिला है।"
  • डिजिटल सशक्तिकरण: देश के 72% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है। विद्यांजलि, दीक्षा, पीएम ई-विद्या, ई-जादुई पिटारा (AI-आधारित खेल आधारित शिक्षण) और AI बॉट्स (जैसे कथा सखी, टीचर तारा) जैसी पहलों से शिक्षा प्रणाली को डिजिटल रूप से सशक्त किया जा रहा है।
  • कॉमन टेस्टिंग: वर्ष 2022 में शुरू हुआ CUET अब स्नातक प्रवेश के लिए एक प्रमुख माध्यम बन गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 क्या है?

"परिचय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता, समावेशिता, समानता, पहुँच और वहनीयता से जुड़ी दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करना है। यह नीति वर्ष 1986 की पूर्ववर्ती राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्थान लेती है, जो तीन दशकों से अधिक समय तक लागू रही। व्यापक परामर्श प्रक्रिया के पश्चात् गठित डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर इस नीति का निर्माण किया गया है, जो 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप एक समग्र, लचीली और बहु विषयी शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना प्रस्तुत करती है।"  

                                                    राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुख्य तथ्य                                                    

  • पिछली नीति: पिछली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थीजिसमें 1992 में संशोधन किया गया था।
  • वर्तमान नीति का आधार: वर्तमान नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक केकस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।
  • सकल नामांकन अनुपात (GER) का लक्ष्य: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत2030 तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • सार्वजनिक व्यय का लक्ष्य: नई शिक्षा नीति का लक्ष्य है कि केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर सार्वजनिक व्यय जीडीपी के 6% हिस्से तक पहुँचे।
  • मंत्रालय का नाम बदला: नई शिक्षा नीति की घोषणा के साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का लक्ष्य भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव लाना हैताकि इसे अधिक समावेशीन्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार किया जा सके । 

लक्ष्य क्षेत्र

लक्ष्य

प्रारंभिक से माध्यमिक शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण

2030 तक, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से लेकर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा का पूर्ण सार्वभौमिकीकरण प्राप्त करना। इसका अर्थ है कि हर बच्चे को, चाहे उसकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच मिले।

FLN (बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान)

2025 तक, 'निपुण भारत' मिशन के तहत यह सुनिश्चित करना कि सभी बच्चे ग्रेड 3 तक बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में निपुण हों। यह NEP के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है, क्योंकि यह बाद की शिक्षा के लिए नींव रखता है।

स्कूली सकल नामांकन अनुपात (GER)

2030 तक, स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना। इसका मतलब है कि प्री-प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी स्तर तक, सभी पात्र आयु वर्ग के बच्चों का स्कूलों में नामांकन हो।

उच्च शिक्षा सकल नामांकन अनुपात (GER)

2035 तक, उच्च शिक्षा में 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना। वर्तमान में यह काफी कम है, और इस लक्ष्य का उद्देश्य अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।

ड्रॉपआउट बच्चे

विभिन्न कारणों से शिक्षा छोड़ चुके लगभग 2 करोड़ बच्चों को वापस मुख्यधारा में लाना, मुख्य रूप से ओपन स्कूलिंग प्रणाली के माध्यम से। यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

समावेशी शिक्षा

2030 तक समावेशी शिक्षा का पूर्ण कार्यान्वयन करना। इसका अर्थ है कि विकलांग बच्चों सहित सभी छात्रों को एक ही छत के नीचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, और उन्हें सीखने के लिए समान अवसर मिलें।

शिक्षक मूल्यांकन

2023 तक शिक्षक मूल्यांकन प्रणाली में सुधार लागू करना। इसका उद्देश्य शिक्षकों के प्रदर्शन का आकलन करने और उनके व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी प्रणाली विकसित करना है।


  • ये पहलें NEP 2020 के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं, जिसका लक्ष्य भारत की शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण बनाना है, ताकि छात्र 21वीं सदी के कौशल के साथ भविष्य के लिए तैयार हो सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का लक्ष्य भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव लाना है, ताकि इसे अधिक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार किया जा सके। 

लक्ष्य क्षेत्र

लक्ष्य

प्रारंभिक से माध्यमिक शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण

2030 तक, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से लेकर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा का पूर्ण सार्वभौमिकीकरण प्राप्त करना। इसका अर्थ है कि हर बच्चे को, चाहे उसकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच मिले।

FLN (बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान)

2025 तक, 'निपुण भारत' मिशन के तहत यह सुनिश्चित करना कि सभी बच्चे ग्रेड 3 तक बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में निपुण हों। यह NEP के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है, क्योंकि यह बाद की शिक्षा के लिए नींव रखता है।

स्कूली सकल नामांकन अनुपात (GER)

2030 तक, स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना। इसका मतलब है कि प्री-प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी स्तर तक, सभी पात्र आयु वर्ग के बच्चों का स्कूलों में नामांकन हो।

उच्च शिक्षा सकल नामांकन अनुपात (GER)

2035 तक, उच्च शिक्षा में 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना। वर्तमान में यह काफी कम है, और इस लक्ष्य का उद्देश्य अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।

ड्रॉपआउट बच्चे

विभिन्न कारणों से शिक्षा छोड़ चुके लगभग 2 करोड़ बच्चों को वापस मुख्यधारा में लाना, मुख्य रूप से ओपन स्कूलिंग प्रणाली के माध्यम से। यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

समावेशी शिक्षा

2030 तक समावेशी शिक्षा का पूर्ण कार्यान्वयन करना। इसका अर्थ है कि विकलांग बच्चों सहित सभी छात्रों को एक ही छत के नीचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, और उन्हें सीखने के लिए समान अवसर मिलें।

शिक्षक मूल्यांकन

2023 तक शिक्षक मूल्यांकन प्रणाली में सुधार लागू करना। इसका उद्देश्य शिक्षकों के प्रदर्शन का आकलन करने और उनके व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी प्रणाली विकसित करना है।

NEP 2020 से जुड़ी प्रमुख पहलें/योजना/कार्यक्रम

  1. पहल/योजना/कार्यक्रम

उद्देश्य

विशेषताएँ

PM-SHRI स्कूल (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया)

नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण मॉडल स्कूलों का निर्माण

समग्र और बहुआयामी शिक्षा, 21वीं सदी के कौशल (जैसे क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या समाधान, सृजनात्मकता), खेल, कला, व्यावसायिक शिक्षा का समावेश

NIPUN भारत अभियान

2026-27 तक ग्रेड 3 के अंत तक सभी बच्चों के लिए आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना

खेल और गतिविधि-आधारित शिक्षण, घरेलू भाषा में पढ़ाने पर जोर, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण सामग्री

PARAKH (परफॉर्मेंस असेसमेंट, रिव्यू एंड एनालिसिस ऑफ नॉलेज फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट)

एक राष्ट्रीय मूल्यांकन नियामक के रूप में मूल्यांकन मानदंड निर्धारित करना

स्कूल बोर्डों के बीच सहयोग, नए मूल्यांकन पैटर्न पर सलाह, NAS/SAS जैसे लर्निंग आउटकम टेस्ट, परीक्षा सुधार, व्यापक मूल्यांकन

NISHTHA (नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट)

शिक्षकों व स्कूल प्रमुखों की क्षमता निर्माण द्वारा स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना

दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, अधिगम के परिणाम, विद्यालय-आधारित आकलन, शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षाशास्त्र, नई पहलों पर प्रशिक्षण

ई-जादुई पिटारा

बुनियादी स्तर (3-8 वर्ष) के बच्चों की शिक्षा को रोचक और आनंदमय बनाना

खेल, चित्रकला, नृत्य, संगीत, नाटक आधारित सामग्री, स्थानीय संसाधनों को समायोजित करने का लचीलापन, बच्चों की शिक्षा में समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी, नवीनतम तकनीक का उपयोग

  • ये पहलें NEP 2020 के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं, जिसका लक्ष्य भारत की शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण बनाना है, ताकि छात्र 21वीं सदी के कौशल के साथ भविष्य के लिए तैयार हो सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: प्रमुख चुनौतियाँ

क्रम

चुनौती

विवरण

1

वित्तीय प्रतिबद्धता में कमी

शिक्षा पर GDP का 6% खर्च करने का लक्ष्य अधूरा

केंद्र और राज्यों दोनों को शिक्षा बजट में वृद्धि करनी होगी (अधोसंरचना, प्रशिक्षण, डिजिटल साधन हेतु)

2

शिक्षकों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण

 21वीं सदी के कौशल, मूल्यांकन और तकनीकी एकीकरण हेतु प्रशिक्षण आवश्यक

STEM और क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी

3

डिजिटल खाई (Digital Divide)

 ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिवाइस और ई-सामग्री की अनुपलब्धता

डिजिटल इंडिया को शिक्षा से और अधिक प्रभावी रूप से जोड़ा जाना चाहिए

4

पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन सुधार

NCF आधारित पाठ्यपुस्तकें और समग्र मूल्यांकन ढाँचा निर्माण धीमी प्रक्रिया

रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिकता पर केंद्रित मूल्यांकन अब भी चुनौती

5

संघीय संरचना में समन्वय की कमी

 शिक्षा समवर्ती सूची में है, जिससे राज्यों के दृष्टिकोण में भिन्नता

 राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्त और प्रशासनिक क्षमता में असमानता

6

मातृभाषा में शिक्षण की व्यवहार्यता

बच्चों की समझ बढ़ाने हेतु मातृभाषा उपयोगी

परंतु भाषा संसाधन और प्रशिक्षित शिक्षक अधिकांश राज्यों में नहीं हैं

7

व्यावसायिक शिक्षा का समावेशन

कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा स्वागतयोग्य प्रयास

औद्योगिक साझेदारी, प्रयोगशालाएँ और प्रशिक्षक अभी निर्माणाधीन अवस्था में

8

सामाजिक और आर्थिक विषमता

SC/ST, OBC, महिलाएँ और ग्रामीण छात्र उच्च शिक्षा में पिछड़े

 छात्रवृत्तियों की कमी, बढ़ती लागत, और सामाजिक पूर्वग्रह मुख्य कारण

क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के सुझाव

  • डिजिटल अवसंरचना में निवेश और ICT आधारित शिक्षण का प्रसार।
  • शिक्षक प्रशिक्षण में नवाचार और तकनीकी एकीकरण को प्राथमिकता।
    अनुसंधान एवं नवाचार को संस्थागत समर्थन।
  • राज्यों और केंद्र के बीच नीति समन्वय और वित्तीय साझेदारी।
  • भाषाई समावेशन हेतु अनुवाद संसाधनों और स्थानीय शिक्षकों की उपलब्धता।

निष्कर्ष:

  • “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 एक दूरदर्शी और व्यापक सुधार की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। विगत पाँच वर्षों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN), डिजिटल शिक्षा की पहुँच, शिक्षक प्रशिक्षण तथा उच्च शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय

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