"भारतीय कृषि परिवर्तन: 1960 से 2024 तक की यात्रा, चुनौतियाँ और 2047 के लिए रोडमैप"

Ultimate Test online
0

  • 1960 के दशक से पूर्व की खाद्य असुरक्षा से लेकर सत्र 2024-25 में 353.96 मिलियन टन के रिकॉर्ड अनाज उत्पादन तक का सफर भारत की कृषि के परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है। यह बदलाव केवल खाद्यान्न तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डेयरी, पोल्ट्री, मात्स्यिकी और बागवानी जैसे विविध क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। इसके बावजूद, उत्पादकता में वृद्धि, संवहनीय कृषि पद्धतियों का अपनाव, और तकनीकी आधुनिकीकरण जैसी चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं। आर्थिक स्थिरता की आधारशिला के रूप में, यदि कृषि इन बाधाओं को पार कर सके, तो 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा को साकार करने में यह निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भारतीय कृषि में बदलाव के प्रमुख कारक

  • कृषि अवसंरचना में निवेश – कृषि अवसंरचना कोष (AIF) और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) जैसी पहलें भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन प्रणालियों को आधुनिक बना रही हैं। AIF के तहत ₹1 लाख करोड़ के निवेश लक्ष्य से कोल्ड चेन और बाजार संपर्क में सुधार हो रहा है।
  • तकनीकी एकीकरण व डिजिटलीकरण – डिजिटल कृषि मिशन (₹2,817 करोड़), AgriStack, और ई-नाम जैसी पहलें बाजार पहुंच, मूल्य प्राप्ति और पारदर्शिता को बढ़ा रही हैं।
  • जैविक और सतत कृषि का विस्तार – मार्च 2024 तक 1.76 मिलियन हेक्टेयर प्रमाणित जैविक भूमि और 3b.63 मिलियन हेक्टेयर भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया में थी। 2025 तक जैविक उत्पादों का बाजार ₹75,00b0 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
  • पशुधन bऔर डेयरी में वृद्धि – भारत वैश्विक दुग्ध उत्पादन में 24% योगदान देता है। ‘गौ चिप’ और ‘महिष चिप’ जैसी जीनोमिक तकनीकें नस्ल सुधार को गति दे रही हैं।
  • मत्स्यिकी विकास – प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से 2025 तक 220 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य, समुद्री खाद्य निर्यात में 60% वृद्धि।
  • खाद्य प्रसंस्करण का विस्तार – PMKSY और PLISFPI जैसी योजनाओं से यह क्षेत्र 2025 तक ₹3.45 लाख करोड़ तक पहुँचने की दिशा में है।
  • अनुसंधान व विकास – 2024 में 109 उच्च उपज, जलवायु-अनुकूल और बायो-फोर्टीफाइड किस्मों का विमोचन।

कृषि क्षेत्र की प्रमुख बाधाएँ

  • भूमि जोत का विखंडन – 85% लघु व सीमांत किसान केवल 45% कृषि भूमि पर खेती करते हैं, जिससे मशीनीकरण और दक्षता में बाधा आती है।
  • सिंचाई पर निर्भरता – 55% फसल क्षेत्र वर्षा आधारित, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है।
  • रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता – मृदा क्षरण और आयात निर्भरता (MOP का 100%, DAP का 60% आयात)।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव – अनियमित वर्षा और तापमान वृद्धि से उपज में गिरावट, जैसे 1°C वृद्धि पर गेहूँ में 6.1% कमी।
  • वित्तीय असमानताएँ – कृषि ऋण का असमान वितरण, अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता।
  • MSP कार्यान्वयन की चुनौतियाँ – सीमित फसलों का कवरेज और बुनियादी ढांचे की कमी।
  • कटाई-पश्चात नुकसान – NABCON अध्ययन के अनुसार, हर साल ₹1.53 ट्रिलियन का खाद्यान्न नुकसान।
  • फसल विविधीकरण की कमी – कुछ राज्यों में धान-गेहूँ चक्र और अधिक जल खपत वाली फसलें भूजल ह्रास का कारण।

विकसित भारत 2047 के लिए कृषि को पुनर्परिभाषित करने के उपाय

  • डिजिटल सहकारी प्लेटफॉर्म द्वारा भूमि समेकन – FPO और ब्लॉकचेन-संचालित अनुबंधों के माध्यम से साझा संसाधन व मशीनीकरण।
  • पंचायत-स्तरीय सूक्ष्म सिंचाई केंद्र – सौर पंप, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, PMKSY व MGNREGA से एकीकरण।
  • जैव-इनपुट पार्क – स्थानीय अपशिष्ट से जैव-उर्वरक उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित लक्षित उपयोग।
  • हाइपरलोकल एग्री-फिनटेक – जन धन, KCC और डिजिटल डेटा से स्वचालित क्रेडिट स्कोर व माइक्रोक्रेडिट।
  • जलवायु-आकस्मिक फसल नियोजन प्रकोष्ठ – GIS व IoT आधारित पूर्वानुमान से फसल चयन व बीमा लक्ष्यीकरण।
  • गति शक्ति आधारित लॉजिस्टिक्स नोड्स – खेत के पास कोल्ड चेन, पैकहाउस, निर्यात गलियारे से जुड़ाव।
  • पोषण-केंद्रित फसल मिशन – कदन्न, दलहन, तिलहन को PDS व मध्याह्न भोजन में प्राथमिकता
  • AMAAS (Agriculture Mechanization as a Service) – साझा ड्रोन, हार्वेस्टर, AI आधारित उपकरण।
  • स्मार्ट सब्सिडी मॉडल – इनपुट सब्सिडी को दक्षता-आधारित प्रोत्साहनों में बदलना।
  • MSP 2.0 – वास्तविक समय डेटा आधारित गतिशील MSP, डिजिटल भुगतान, विकेंद्रीकृत खरीद।
  • कृषि-तकनीक नवाचार क्षेत्र – ग्रामीण जिलों में तकनीक परीक्षण व स्टार्टअप साझेदारी।

निष्कर्ष

  • भारत की कृषि यात्रा अब "भोजन सुरक्षा" से आगे "किसान समृद्धि" की दिशा में बढ़नी चाहिए। तकनीक, जलवायु-अनुकूल पद्धतियों और मूल्य-वर्द्धन पर केंद्रित रणनीतियों के साथ, कृषि न केवल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सशक्त कर सकती है, बल्कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को भी साकार कर सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें (0)
Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !